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झूठ के सहारे भर्ती किए संविदा टीचर, अब वेतन में फसा पेंच

 UGC ने पैसा भेजा ही नहीं था,फिर भी कर लीं चहेतों की नियुक्तियां

प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर : जीवाजी विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों में पिछले माह संविदा पर भर्ती किए गए असिस्टेंट प्रोफेसर अब वेतन के लिए विवि में चक्कर काट रहे हैं। चूंकि चहेतों को लाभ पहुंचाने जेयू के आला अफसरों ने जल्दबाजी में नियुक्तियां की हैं,इसलिए अब संबंधितों के वेतन भुगतान में पेंच फंस गया है। हकीकत यह है कि संविदा शिक्षक रखने के लिए यूजीसी ने विवि को अलग से 50 लाख रूपए भेजा ही नहीं है। इसलिए इन नियुक्तियों में जेयू के अफसरों का झूठ सामने आने लगा है। बता दें कि संविदा शिक्षकों के 33 पदों पर 25 हजार फिक्स मासिक सैलरी पर जेयू ने संविदा शिक्षक भर्ती किए हैं। इनकी नियुक्तियां करने से पहले जेयू के अधिकारी ताल ठोक कर कह रहे थे कि स्ववित्तीय विभागों में संविदा शिक्षक रखने यूजीसी ने अलग से 50 लाख रूपए भेजे हैं,इसलिए इन नियुक्तियों से जेयू के ऊपर किसी भी तरह का वित्तीय भार नहीं आएगा। उच्च शिक्षा विभाग को भी अनुमति लेने जो पत्र भेजा था,उसमें भी यही उल्लेख किया गया था कि संविदा शिक्षकों को यूजीसी की राशि से ही वेतन भुगतान होगा। जिस पर 31 मार्च 2017 तक के लिए ही संविदा शिक्षक भर्ती करने की शर्त लगाकर अनुमति दी। अन्य भी नौ शर्तें लगाई।


विकास शाखा ने वेतन की फाइल लौटाई

सूत्रों की मानें तो भर्ती प्रक्रिया में शासन के अनुमति पत्र की कुछ शर्तों की अनदेखी तो की ही गई,वहीं यूजीसी से 50 लाख रूपए पैसा मिलने का भी झूठ बोला गया। इस झूठ से पर्दा तब उठ गया जब संविदा शिक्षकों का जनवरी माह का वेतन निकालने की फाइन बढ़ाई गई। विकास शाखा ने यह कहते हुए फाइल लौटा दी है कि यूजीसी से संविदा शिक्षकों के लिए कोई भी पैसा नहीं मिला है। इसलिए जब तक यूजीसी से पैसा नहीं आ जाता,तब तक जेयू के खासे से इनका वेतन निकालने का विचार किया जा रहा है।  इसके बाद सवाल यह खड़ा हुआ है कि जब यूजीसी से पैसा आया ही नहीं तो फिर संविदा शिक्षकों की नियुक्तियां यूजीसी के अनुदान के नाम पर क्यों की गर्इं। 
स्त्रोत http://www.pradeshtoday.com/newsdetails.php?news=Lie-teacher-recruitment-contract,-pay-now-netted-screw&nid=162605

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