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February 10, 2017

बिहार लोक सेवा आयोग के पीटी परीक्षार्थियों के लिये एक बड़ी खुशखबरी है


बिहार लोक सेवा आयोग के पीटी परीक्षार्थियों के लिये एक बड़ी खुशखबरी है. पीटी परीक्षा में भाग लेने वाले 35 छात्रों को पटना हाइकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. बिहार लोक सेवा आयोग ने कोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली है. अब 35 याचिकाकर्ता छात्रों की दोबारा परीक्षा ली जायेगी. इससे पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग की 60वीं से 62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 12 फरवरी को होगी या नहीं, इसको लेकर संशय बरकरार था. गुरुवार को इस मामले में जस्टिस डाॅ. रवि रंजन के एकलपीठ ने बीपीएससी को निर्धारित तिथि को परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी थी.

अब होगी परीक्षा

हालांकि, इसके तत्काल बाद बीपीएससी ने एकलपीठ के फैसले के खिलाफ कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में अपील याचिका दायर कर दी थी. जिस पर आज कोर्ट में सुनवाई हुई, उसके बाद कोर्ट ने यह फैसला दिया. इसके पहले एकलपीठ  ने आयोग को सभी याचिकाकर्ताओं को भी परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रवेशपत्र जारी करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि जितने लोगाें को प्रवेशपत्र नहीं मिल पाया है, सबको इतने कम समय में प्रवेशपत्र उपलब्ध  कराना संभव नहीं है, इसलिए जिन लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, यदि उनके आवेदनों में कोई त्रुटि नहीं हो, तो उन्हें तत्काल  प्रवेशपत्र मुहैया कराया जाये. कोर्ट ने यह भी कहा कि बीपीएससी चाहे तो इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है.

संशय का बादल छटा

इसके बाद बीपीएससी की ओर से तुरंत कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में अपील दायर की गयी थी, जिसे कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की तिथि तय कर दी थी. गौरतलब है कि 12 फरवरी को निर्धारित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के कई आवेदकों को प्रवेशपत्र नहीं मिल पाया था. कुछ को मिला था, तो उसमें कई त्रुटियां पायी गयी थीं.
 http://www.prabhatkhabar.com/news/patna/bpsc-pt-exam-date-patna-high-court/940052.html

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2 comments:
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  1. भोजपुरी में एक पुरानी कहावत है कि मार के डर से भूत भी सच बड़बड़ाने लगता है, इन्सान तो इन्सान ही है। कुछ ऐसा ही हुआ बिहार कर्मचारी चयन आयोग के सचिव और पर्चा लीक कांड के सूत्रधार परमेश्वर राम के साथ। आरोप है कि राज्य में अराजपत्रित और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की बहाली करने वाले बिहार कर्मचारी चयन आयोग में मध्‍य प्रदेश के व्‍यापमं टाइप का घोटाला चल रहा है। परीक्षा से पहले ही पर्चा बाजार में बिकने लगता है और अंदरखाने भी ले-देकर रिजल्ट दिया जा रहा है। जब पानी सिर से ऊपर चला गया तो सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी के अफसरों ने जब पूछताछ के लिए आयोग के सचिव परमेश्वर राम को धरा तो पहले वह अकड़ने लगे। फिर अपने राजनीतिक आका का नाम लेकर मोबाइल से उनका नंबर मिलाने लगे पर एसआईटी के लोग नरम नहीं पड़े। एक गठीले बदन वाले पुलिस अधिकारी ने जब उनके गाल पर कसकर दो झापड़ मारा तो परमेश्वर राम के हलक से सच बाहर आने लगा। फिर सच्चाई सुनकर पटना के सीनियर एसपी मनु महाराज समेत नहां मौजूद तमाम अधिकारी सन्न रह गए।
    गिरफ्तार परमेश्वर राम ने खुलासा किया है कि आयोग ने पिछले 5 सालों में जितनी भी नियुक्तियां की हैं, सभी में भयंकर गड़बड़ियां हुई हैं। अरबों रूपये की उगाही हुई है तथा सैकड़ों बड़े अधिकारियों और राजनेताओं के सगे-सम्बधियों की बहाली की गई है। उसने रोते हुए पूछताछ करने वाले पुलिस अधिकारी से कहा ‘‘देवता, हम तो इस वृहद स्कैम के एक अदने से खिलाड़ी हैं। हमें क्यों इतना पीट रहे हैं।” छपरा जिले के रहने वाले और अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले इस अधिकारी ने ललकारते हुए कहा, ‘‘हिम्मत है तो तो असली किंगपिन को पकड़िये जिनके इशारे पर ये सब हो रहा है।’’ पूछताछ के दौरान आयोग के सचिव ने 36 राजनेताओं (जिसमें 7 मंत्री और 29 विधायक हैं) के अलावा 9 आईएएस अधिकारियों का नाम लिया है जो किसी न किसी रूप में इस घोटाले का लाभार्थी रहे हैं।
    पुलिस सूत्रों के हवाले से इस घोटाले के तार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा से जुड़े होने की आशंका है। मामले में कुख्यात रंजीत डॉन के साथ-साथ मुख्यमंत्री के एक करीबी बड़े राजनेता की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि सत्ता के गलियारे में वो राजनेता सीएम के क्लोन के रूप में ट्रीट किए जाते हैं। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि शायद इसीलिए सीएम ने जांच की जिम्मेदारी एसआईटी को दी है ताकि जांच में कुछ अगर-मगर की गुंजाइश रखी जा सके। 31 मई 2015 को उद्भेदित चर्चित टॉपर/मेरिट घोटाला में भी यही हुआ था। इस स्कैम की भी पटना के सीनियर एसपी मनु महराज ने ही जांच की थी। कुल 30 लोगों को पकड़कर जेल भेजा गया था, जिसमें बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह एवं सरगना बच्चा सिंह शामिल है। इस मामले में जांचकर्ता का हाथ असली गुनहगार तक पहुंचता उससे पहले ही जांच पर फुल स्टॉप लगा दिया गया था।

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  2. ये पहली बार फैसला है कि सिर्फ पिटिशनकर्ता को ही कोर्ट से न्याय मिला है।
    अब यही हाल रहा तो न्याय के लिए किसी केस में सभी अभायर्थि को पिटिशनकर्ता बनाया जायेगा।
    ये न्याय नहीं है बल्कि उन अभ्यर्थियों के साथ जुल्म है जिन्होंने कोर्ट पर भरोसा कर खुद भी अपील नहीं किया बल्कि दोस्तों के ही भरोसे रह गए।
    ये नैसर्गिक न्याय के खिलाफ फैसला है।

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