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January 25, 2017

मांगे नहीं मानी तो करेंगे उग्र आंदोलन संविदा कर्मचारी


मप्र संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के नेतृत्व में भोपाल में आयोजित एक दिवसीय आंदोलन तथा प्रदर्शन में मंगलवार को संगठन ने भोपाल एसडीएम को ज्ञापन सौंपा तथा अप्रेजल प्रक्रिया रद्द करने सहित अन्य मांगों के नहीं मानने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
आरएसएस समॢथत भारतीय मजदूर संघ अध्यक्ष ज्ञानप्रकाश तिवारी, महामंत्री केपी सिंग व गणेश मिश्रा ने भी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों को उचित मानते हुए समर्थन दिया है। सरकार को चेतावनी दी है कि जल्द ही उपरोक्त संदर्भ में निर्णय लिया जाए अन्यथा आगामी समय में बीएमएस के बैनर तले कार्य कर रहे समस्त कर्मचारी संगठन संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के पक्ष में एक साथ प्रदर्शन करेंगे।

इस अवसर पर भोपाल पहुंचे पदाधिकारियों में जिलाध्यक्ष जितेंद्र यदुवंशी, दिनेश भावरकर, संजय बाउसकर, रूपेश साहू, अनूप साहू, डॉ. आर उइके सहित अन्य संविदा कर्मचारी मौजूद थे। वहीं हड़ताल को लेकर जिला अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा।

http://www.patrika.com/news/chhindwara/contract-staff-warns-to-government-1495811/

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  1. राज्य के सात लाख से अधिक राज्यकर्मियों व पेंशनधारियों को सातवें वेतनमान का लाभ दिलाने के लिए बनी वेतन कमेटी मार्च तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. इसके बाद राज्य सरकार के स्तर पर इसे लागू करने का फैसला लिया जायेगा. नियोजित शिक्षकों या संविदा पर नियुक्त कर्मियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा. पूर्व मुख्य सचिव जीएस कंग की अध्यक्षतावाली इस कमेटी के सदस्य वित्त सचिव(व्यय) राहुल सिंह ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस संबंध में पूछे जाने पर यह जानकारी दी.

    राज्य कैबिनेट ने पिछले साल 21 दिसंबर को वेतन कमेटी को मंजूरी दी थी. केंद्र सरकार पहले सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर चुकी है. केंद्र के तर्ज बिहार सरकार भी अपने कर्मचारियों को वेतन कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सातवें वेतनमान का लाभ देगी. इससे राज्य के खजाने पर 10-11 हजार करोड़ अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. वित्त सचिव (व्यय) राहुल सिंह ने बताया कि अगले सप्ताह वेतन कमेटी गठित होने की अधिसूचना जारी हो जायेगी. 20 जनवरी तक कमेटी कर्मचारी संघों और पेंशनभोगियों से सुझाव और दावा-आपत्ति लेगी. फरवरी के दूसरे सप्ताह में इस पर सुनवाई होगी. कमेटी मार्च तक अपनी रिपोर्ट दे देगी. कमेटी के कामकाज लिए सरकार ने विकास भवन (नया सचिवालय) में जगह उपलब्ध करा दी है.

    केंद्र और राज्य के कई पदों और वेतनमान में काफी अंतर

    राज्य सरकार ने इस बार फिटमेंट कमेटी की जगह वेतन कमेटी का गठन किया गया है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्र के अनुरूप या उनके समानुपात में पदों के स्टैंडर्ड या कैटोगराइजेशन की जरूरत इस बार नहीं पड़ेगी. राज्य में केंद्रीय पदों के अनुरूप पदों का समानुपातिक सृजन 1975 में गठित की गयी फिटमेंट कमेटी में कर दिया गया था. इसी के आधार पर इस बार भी पद के अनुसार वेतन की समानुपातिक रूप से बढ़ोतरी कर दी जायेगी. यह काम वेतन कमेटी के जरिये ही हो जायेगा. केंद्र और राज्य के कई पदों और वेतनमान में काफी अंतर है और कई पद ऐसे हैं, जो सिर्फ राज्य में ही हैं. वेतन कमेटी समीक्षा करके सभी पदों के लिए नये वेतनमान का निर्धारण करेगी. राज्य में सर्विस और कैडर पदों को मिला कर इनकी संख्या करीब 45 है.

    20% तक की हो सकती है बढ़ोतरी

    राज्य सरकार के कर्मचारियों को उनके मूल वेतन में करीब 14%, एचआरए में पांच प्रतिशत समेत अन्य भत्तों को मिला कर कुल 20% के आसपास वेतन बढ़ोतरी का लाभ हो सकता है. वित्त विभाग के आकलन के अनुसार, यह बढ़ोतरी 20 से 21% के बीच ही रहेगी. इसका सीधा लाभ राज्य सरकार के करीब तीन लाख 60 हजार कर्मचारियों और चार लाख 10 हजार पेंशनधारकों को होगा.

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