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December 23, 2016

उच्च शिक्षा में लेक्चरर की बहाली में अब समाप्त होगा आरक्षण


पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को आयोजित लोक संवाद के दौरान राज्यभर के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को मिड डे मील स्कीम से दूर रखने के सुझाव पर अपनी सहमति जाहिर कर दी है। इसके साथ ही, पटना में सोमवार को आयोजित लोक संवाद केंद्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के शिक्षा विभाग में सुधार करने का भी अधिकारियों को निर्देश दिया है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में लेक्चरर की बहाली की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए आरक्षण को समाप्त कर दिया है। इससे समाज के सभीवर्ग के लोगों को लेक्चरर के पद पर आसानी से नियुक्ति की जा सकेगी। इसके साथ ही सामाजिक स्तर पर किसी तरह का भेदभाव भी नहीं होगा।

Sources @ http://livebihar.live/postdetail/index/id/31998/cm-nitish-taken-decision 

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  1. संविधान बनने के बाद से वोट बैंक के लिए आरक्षण का इस्तेमाल और मंडल कमिशन की रिपोर्ट के आधार पर दिए गए आरक्षण को रिव्यू करने को चुनौती दिए जाने संबंधी याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले पर 15 फरवरी के लिए सुनवाई तय की गई है। स्वयंसेवी संस्था स्नेहांचल चैरिटेबल सोसायटी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया तब से लेकर अब तक राजनीति के लिए इसका इस्तेमाल किया गया है।




    वोट बैंक के लिए आरक्षण पाने वाली जातियों की संख्या में बढ़ोत्तरी तो लगातार की जा रही है लेकिन किसी जाति को इससे बाहर कभी नहीं किया गया। आरक्षण लागू करते हुए हर दस वर्ष में इसे रिव्यू करने का प्रावधान रखा गया था लेकिन यह काम नहीं किया गया। हरियाणा में आरक्षण के लिए मंडल कमिशन की रिपोर्ट को 1995 मेंं अपनाया और इस रिपोर्ट के आधार पर शैड्यूल और बी तैयार किया गया था। इस रिपोर्ट में भी यह कहा गया था कि दस वर्षों बाद दिए गए आरक्षण की समीक्षा की जाए। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सर्वे या कोई दूसरा प्रयास नहीं किया गया। 1993 में कंबोज कमिशन बनाया गया तो वहीं 1999 में गुरनाम सिंह कमिशन बनाया गया। इन सभी में कुछ जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की बात तो कही गई लेकिन सर्वे या आंकड़ों के आधार पर किसी को बाहर करने की बात नहीं कही गई। याचिका में कहा गया कि 1951 से लेकर अभी तक केवल जातियों को शामिल ही किया गया है। ऐसे में आरक्षण की समीक्षा कराई जानी चाहिए। यह जानने का प्रयास किया जाना चाहिए कि कौन सी जाति आरक्षण का लाभ पाकर आगे बढ़ी है और उस जाति को पिछड़ा वर्ग की सूची से बाहर किया जाना चाहिए।


    http://sarkariniyukti.blogspot.com/2016/12/blog-post_48.html

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